गुरुवार, 16 अक्तूबर 2008

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अन्तरिक्ष मे चोरी 

आखिर एक दिन वह मामा के साथ अंतरिक्ष स्टेशन  में पहुंच गया. अंतिरक्ष शटल  में बैठने से पहले उन्हें विशेष  प्रकार के कपडे दिए गए, जिन का नाम अंतरिक्ष सूट था. आव’यक सुरक्षा जांच के बाद वे अपनी सीटों पर जा बैठे. अटैची उन से स्टेशन पर ही ले ली गई. अटैची में एक रंगबिरंगा स्टिकर लगाने के बाद उन को एक टोकन दे दिया गाया.

शिखर चिंतित हो गया कि कहीं कोई उस की अटैची से किसी प्रकार की छेडछाड न कर बैठे. उस ने सोचा था कि वह यात्रा में अटैची को उपने पास ही रखेगा. इसी वजह से उस ने उसे में ताला भी नहीं लगाया था. पूरी यात्रा में उस को यही  चिंता सताती रही कि कहीं उस के सामान की चोरी ने हो जाए. उस को अत्यधिक चिंतित देख कर मामा ने उस को बताया कि सब यात्रियों का सामान अंतरिक्ष शटल के सामान कक्ष में बंद है. वहां अब कोई नहीं जा सकता, पर  शिखर की चिंता कम न हुई.

अंत में वे अंतरिक्ष नगर पहंच गए. शटल से उतरने के बाद उन्होंने थोडी दे अंतरिक्ष स्टेशन में इंतजार किया. जल्दी ही यात्रियों का सामान आ गया. मामाजी ने टोकन दे कर अपनी अटैची ले ली. शिखर से रहा नही गया. उस ने उपनी अटैची देखने के लिए ज्यों ही उस को उठाया, चौंक गया. अटैची एकदम हलकी  की. घर  में उसे अटैची उठाने में बहुत परेशानी  हो रहीं थी. पर अब तो अटैची एकदम खाली थी.

वह जोर से चिल्लाते हुए मामाजी से बोला, ”मैं ने कहा था न... यह देखिए, मेरा सामान अंतरिक्ष यान में चोरी हो गया“ है कहतेकहते उसे की आंखों से आंसू टपकने लगे. 

”क्या हुआ, बेटे?“ मामाजी ने घबरा कर पूछा. उन को समझ में नहीं आया कि शिखर को चोरी का पता कैसे चता है, क्योंकि अटैची तो अभी खोली नहीं गई. 

उन्होंने पूछा, ”क्या खो गया है?“

”अभी बताता हूं?“ सुबकते हुऐ उस ने कहा. फिर अटैची खोली तो देखा कि सामान ठीक वैसे का वैसा ही रखा हुआ है. वह आ’चर्यचकित था. उस ने अटैची बंद की. फिर दोबारा उस को उठा कर देखा अटैची बहुत हलकी थी. 

उस ने अटैची को ले कर चलने की कोशिश की तो पाया कि वह उस को आराम से ले कर चल सकता है. शिखर हैरानी से अटैची को देखने लगा. उसे समझ में नहीं आ रहा था  कि वह इतनी हल्की कैसी हो गई 
है.

चालू है 

4 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

good story which aims to impart scientific knowledge in a very subtle and spontaneous way !

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर कहानी....बच्‍चे खेल खेल में ही विज्ञान की बातें सीख लेंगे।

chandar ने कहा…

Dear Sir,
Jai Baba to You and Merry Christmas
It is a very nice effort.There is lot to be done in the area of literature for the children. Please do keep writing. Blog is waonderful medium to be creative and to express.
Love
Chandar
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दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

अच्छा है आप अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण समझा रहे हैं। मगर यह वर्ड वेरीफिकेशन हटाएं वरना टिप्प्णियाँ नहीं मिलेंगी।