गुरुवार, 18 दिसंबर 2008

अन्तरिक्ष मे चोरी

कैंचियों से मत डराओ तुम हमें
हम परों से नहीं होसलों से उड़ा करते हैं
PURCHASE MY BOOK:
कितना सच? कितना झूठ?? at:
http://pothi.com/pothi/node/79

6 टिप्‍पणियां:

अशोक मधुप ने कहा…

हिंदी लिखाड़ियों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे बढ़िया लिखे। हजारों शुभकामनांए।
कृपयर सैटिंग में जाकर वर्ड वैरिफिकेशन हटा दें । इससे टिप्पणी देने मे परेशानी होती है।

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Abhishek ने कहा…

Is kahani ke pichle ank bhi padhe. Bacchon ko rochak andaj mein aur vagyanik jankariyan pahunchane ka sarthak pryas hai aapka. Badhai.

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

आपका चिटठा जगत में स्वागत है निरंतरता की चाहत है अत्यन्त भावभीनी कविता
मेरे ब्लॉग पर भी पधारें

प्रकाश बादल ने कहा…

वाह वाह वाह वाह वाह क्या बात है दो लाईने ही बहुत कुछ कह गई वाह

Manoj Kumar Soni ने कहा…

बहुत ... बहुत .. बहुत अच्छा लिखा है
हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
टेम्पलेट अच्छा चुना है. थोडा टूल्स लगाकर सजा ले .
कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें .(हटाने के लिये देखे http://www.manojsoni.co.nr )
कृपया मेरा भी ब्लाग देखे और टिप्पणी दे
http://www.manojsoni.co.nr